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तेरा परछाई

 मैं तेरा संजोया सपना हूँ,               तू मेरी रूह सजाने बाली l तू सारे फूलों कि रानी,              मैं उस वगिया का माली l मैं काले बादल जैसा,           तू चमकते मोतियों कि बारिश l देखते हीं हो रहा है,           तुझे हमें पाने कि ख्वाहिस l तू पूर्णिमा कि चांदनी,            मैं अमावस के रात जैसा l टूटे ना प्रीत कभी,              हम दोनों का हो साथ ऐसा l तू पूर्ण कहानी हो,              मैं अधूरा कविता तेरा l तू गुलाब कि पखुड़ी,              मैं मुरझाया सरिफा तेरा l जब चलती हो तो,            मिट्टी कि खुशबू तेरे क़दमे चूमें l तेरे रूह कि खुशबू,          शुँघ कर ए मदमस्त धरती झूमें l तुझमे कौन सा जादू है,           जो हमें बनाए जा रहा दीवाना l जमीं और आसमां...
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 किसी से पहली बार मिलना लाजबाब होता है l बिछड़ने का गम तो हमेशा बेहिसाब होता है l