तेरा परछाई
मैं तेरा संजोया सपना हूँ,
तू मेरी रूह सजाने बाली l
तू सारे फूलों कि रानी,
मैं उस वगिया का माली l
मैं काले बादल जैसा,
तू चमकते मोतियों कि बारिश l
देखते हीं हो रहा है,
तुझे हमें पाने कि ख्वाहिस l
तू पूर्णिमा कि चांदनी,
मैं अमावस के रात जैसा l
टूटे ना प्रीत कभी,
हम दोनों का हो साथ ऐसा l
तू पूर्ण कहानी हो,
मैं अधूरा कविता तेरा l
तू गुलाब कि पखुड़ी,
मैं मुरझाया सरिफा तेरा l
जब चलती हो तो,
मिट्टी कि खुशबू तेरे क़दमे चूमें l
तेरे रूह कि खुशबू,
शुँघ कर ए मदमस्त धरती झूमें l
तुझमे कौन सा जादू है,
जो हमें बनाए जा रहा दीवाना l
जमीं और आसमां भी,
शर्माजाए इतना ना इठलाना l
===== ranjeet kumar narach
🌹🌹❤Kushwaha ji 🌹🌹❤
Thinking
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